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ईरान ने Strait of Hormuz को अपना “आतंकी हथियार” बना लिया,* *मीडिया इसकी पुरजोर निंदा न करके ईरान को हीरो बना रहा है और ट्रंप की हार बता रहा है -*

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ईरान ने Strait of Hormuz को अपना “आतंकी हथियार” बना लिया,* *मीडिया इसकी पुरजोर निंदा न करके ईरान को हीरो बना रहा है और ट्रंप की हार बता रहा है -*

*ईरान ने Strait of Hormuz को अपना “आतंकी हथियार” बना लिया,*
*मीडिया इसकी पुरजोर निंदा न करके ईरान को हीरो बना रहा है और ट्रंप की हार बता रहा है -*

मीडिया का अजीब रवैया है जो “ट्रंप सरेंडर” के गीत गा रहा है लेकिन ईरान द्वारा होर्मुज को अपना “आतंकी हथियार” बना कर हर जहाज से 20 लाख डॉलर की उगाही बनाने पर भी उसकी निंदा न करके ईरान को “हीरो” बना रहा है - इस विषय पर मीडिया में कोई चर्चा हो ही नहीं रही -

Strait of Hormuz के बारे वास्तविक स्थिति क्या है, यह समझने की आवश्यकता है -

ईरान Strait of Hormuz (जलडमरूमध्य) का मालिक नहीं है, लेकिन वह इस जलडमरूमध्य पर ओमान के साथ साझा नियंत्रण रखता है - लगभग 21 मील चौड़ा यह संकरा मार्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग है, जहाँ ईरान उत्तरी तट रेखा को नियंत्रित करता है और भू-राजनीतिक तनाव के समय अक्सर वास्तविक (de facto) संचालनात्मक नियंत्रण का प्रयोग करता है, जो अपने आप में एक आतंकवाद बन चुका है -

साझा अधिकार (Shared Ownership):
यह जलडमरूमध्य ईरान और Oman दोनों के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आता है-

भौगोलिक नियंत्रण (Geographical Control):
ईरान उत्तरी तट और जलडमरूमध्य के कुछ द्वीपों को नियंत्रित करता है, हालांकि सभी द्वीप उसके नियंत्रण में नहीं हैं-

रणनीतिक महत्व (Strategic Importance):
यह विश्व का एक प्रमुख ऊर्जा मार्ग (चोकपॉइंट) है, जहाँ से लगभग 20% वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) का परिवहन होता है, लेकिन यह तकनीकी रूप से केवल ईरान का जलक्षेत्र नहीं है लेकिन ईरान ने उस पर जबरन कब्ज़ा किया हुआ है

वर्तमान स्थिति (2026):
ईरान ने एक प्रकार की “टोल बूथ” व्यवस्था स्थापित की है, जिसमें जहाजों को गुजरने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है, विशेषकर 2026 के ईरान युद्ध के बाद-
ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति और सैन्य उपस्थिति के कारण इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर मजबूत प्रभाव रखता है, लेकिन इसका उस पर पूर्ण स्वामित्व नहीं है-
Strait of Hormuz किसी एक देश की संपत्ति नहीं है, यह एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है।
ईरान को इसे पूरी तरह बंद करने का कानूनी अधिकार नहीं है, फिर भी वह अपनी ताकत के बल पर जहाजों को रोकने और नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है-
इस जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है और कई जहाज फंसे हुए हैं लेकिन EU, ब्रिटेन और NATO देश इस पर ट्रंप का साथ नहीं देना चाहते - फिर भुगतेंगे हर जहाज पर 20 लाख डॉलर का टोल -
दूसरी ओर, Donald Trump ईरान को बार-बार चेतावनी दे रहे हैं कि वह इस मार्ग को खोले- उल्टा ईरान युद्ध जारी रखने के बहाने बना रहा है, जैसे आज पाकिस्तान में होने वाली कथित वार्ता से पहले उसने शर्त रख दी कि लेबनान पर हमले बंद किए जाएं और लेबनान को भी ceasefire में शामिल किया जाये - जबकि ये दोनों शर्तें बेबुनियाद हैं क्योंकि ईरान ने तो स्वयं इज़रायल को ceasefire से अलग कर दिया था - 
मेरा फिर यही  सवाल यह है:

मीडिया बार-बार “Trump Surrenders” का ढोल क्यों पीट रहा है,
जबकि ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर दबाव और “टोल” जैसी आतंकित करने वाली कार्रवाई पर उतनी चर्चा क्यों नहीं हो रही?
Oman भी इस जलमार्ग का हिस्सा नियंत्रित करता है, लेकिन वह टकराव से बचते हुए तटस्थ भूमिका निभा रहा है।
👉 सच्चाई यही है:
कानून के अनुसार Hormuz खुला रहना चाहिए,
लेकिन जमीनी हकीकत में ताकत का खेल खेल कर ईरान दुनिया भर के लिए ऊर्जा संकट पैदा कर रहा है- इसकी गंभीर निंदा होनी चाहिए और ईरान पर दबाव बढ़ाना चाहिए। यह बात आज हिन्दू रत्न राहुल गोयल राष्ट्रीय प्रभारी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच नई दिल्ली भारत ने अपने उद्बोधन पर बताई।www.dspmrvm.com

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